द केरल स्टोरी रिव्यू: दर्शको को पसंद आई अदा शर्मा की ‘द केरला स्टोरी’, बोले- एजेंडा नहीं है ये फिल्म

द केरल स्टोरी रिव्यू:

फिल्म- द केरल स्टोरी

निर्देशक- सुदीप्तो सेन

कास्ट- अदा शर्मा, सोनिया बलानी, योगिता बिहानी, सिद्धि ईरानी, प्रणय पचौरी, प्रणव मिश्रा आदि।

निर्माता- विपुल अमृतलाल शाह

अदा शर्मा और निर्देशक सुदीप्तो सेन की फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म टीजर रिलीज होने के बाद से ही विवादों में घिरी रही है। फिल्म में दिखाया गया है की केरल की लड़कियों का धर्म बदलवाकर, उन्हें कैसे ISIS के लिए रिक्रूट किया गया। कुछ लोग फिल्म को एजेंडा बता रेह हैं। आइए जानते हैं इस रिव्यू में कि फिल्म में क्या है?

द केरल स्टोरी रिव्यू

द केरल स्टोरी रिव्यू:

फिल्म की कहानी की शुरुआत फातिमा उर्फ शालिनी उन्नीकृष्णन (अदा शर्मा ) से होती है, जिससे अफसर पूछताछ कर रहे हैं कि तुमने आईएसआईएस कब जॉइन किया। तब फातिमा उर्फ शालिनी बोलती है कि ये जानने से पहले आपको ये जानना जरूरी है कि मैनें आईएसआईएस कैसे और क्यों जॉइन किया। इसके बाद फिल्म की कहानी केरल में शिफ्ट होती है। जहां केरल के कासरगोड में एक नर्सिंग स्कूल में चार छात्राएं एडमिशन लेती हैं। शालिनी उन्नीकृष्णन अपने होस्टल में अपने रूममेट्स गीतांजलि (सिद्धि इदनानी), निमाह (योगिता बिहानी) और आसिफा (सोनिया बलानी) से होती है। शालिनी, निमाह और गीतांजलि को आसिफा के खौफनाक इरादों से अनजान थी।

द केरल स्टोरी रिव्यू

आसिफा का प्लान अपने रूममेट्स का धर्म परिवर्तिन कराकर इस्लाम में परिवर्तित करने का था। जिसके लिए वो उन्हें अपने दो नकली भाइयों से मिलाती है और वो इस जाल में फंस जाती हैं। लड़कियों का ब्रेन वॉश करने के लिए उन्हें नशे की दवाइयां दी जाती हैं। इसके साथ-साथ उनके मन में अपने धर्म के प्रति अविश्वास और परिवार के प्रति नफरत पैदा की जाती है। रमीज नामक शख्स शालिनी को अपने प्यार के जाल में फंसाकर उसे गर्भवती कर देता है। जिसके बाद शालिनी को समाज के डर से इस्लाम क़ुबूल करना पड़ा। जिसके बाद शालिनी किसी अंनजान इंसान से निकाह करके पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रास्ते भारत छोड़कर सीरिया के लिए निकलती है। शालिनी के लिए के लिए सफर बहुत भयानक होने वाला है, वहीं दूसरी तरफ उसकी दोनों सहेलियों निमाह और गीतांजलि भी नर्क से गुजर रही थी। आगे क्या हुआ इसके लिए आपको अपने नजदीकी थियेटर में

द केरल स्टोरी रिव्यू: निर्देशन

फिल्म द केरल स्टोरी का निर्देशन सुदीप्तो सेन ने किया है। फिल्म के हर सीन में आप उनके उम्दा निर्देशन की झलक देख सकते हैं। सुदीप्तो सेन ने फिल्म के सभी कैरेक्टर को मानो जिंदा कर दिया हो, निर्देशक अपने कैरेक्टर के माध्यम से आपको उनका दर्द महसूस कराने में कामयाब रहे हैं। निर्देशन ने एक गंभीर मुद्दा चुना है, जिसे शूट करना और लोगों तक पहुंचाना कोई आसान काम नहीं है। इसके लिए फिल्म के निर्देशक सुदीप्तो सेन और निर्माता विपुल अमृतलाल शाह की तारीफ करनी चाहिए।

द केरल स्टोरी रिव्यू

द केरल स्टोरी रिव्यू: परफॉर्मेंस

एक्‍ट‍िंंग की बात करें तो फिल्म के हर एक किरदार ने फिल्म में अपने काम से जान फूंक दी है। जहां अदा शर्मा, शालिनी के रूप में इतनी मासूम दिखी है कि उनके साथ ऐसा देखकर आपका भी दिल रो पड़े। वहीं वो फातिमा के रूप में वो इतनी बेबस और डरी हुई दिखी है कि उनकी हालत देखकर आप भी डर जाएं। फिल्म में अदा ने कमाल का काम किया है। इसके लिए उनकी सराहना करनी चाहिए। वहीं उनकी सहेलियां बनी सिद्धि इदनानी और योगिता बिहानी ने भी अच्छा काम किया है। फिल्म की सपोर्टिंग कास्ट ने भी अच्छा काम किया है।

द केरल स्टोरी रिव्यू

द केरल स्टोरी ट्विटर रिव्यू-

द केरल स्टोरी देखने के बाद फिल्म क्रिटिक और ट्रेड एनालिस्ट सुमित कदेल ने भी फिल्म का रिव्यू किया है। सुमित कहते है कि अदा शर्मा का काम शानदार है, उनका मलयाली हिंदी लहजा शानदार था। उन्होंने भावनात्मक दृश्यों में बेस्ट परफॉर्मेंस दी है।

कडेल ने लिखा: “द केरल स्टोरी- 4 स्टार। द केरल स्टोरी आधुनिक भारत की सबसे खराब मानव त्रासदियों में से एक से संबंधित है।

फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर रजत लुंकड़ ने फिल्म के बारे में कहा कि अदा शर्मा ने जीवन भर का प्रदर्शन दिया है। लुंकड ने ट्वीट में लिखा- “केरल की कहानी ‘विचारोत्तेजक’ है। यह एक स्पाइन-चिलिंग फिल्म है जो आपको कठोर वास्तविकता से असहज करती है। इस फिल्म को बनाने का श्रेय विपुल अमृतलाल शाह और सुदीप्तो सेन को जाता है। अदा शर्मा ने लाइफटाइम परफॉर्मेंस दी है। द केरला स्टोरी रिव्यू- 4 स्टार”।

एक और यूजर ने लिखा, “ यकीनन द केरला स्टोरी देखने के लिए अपनी मेहनत की कमाई खर्च कर रहा हूं। विवाद का मतलब यह होना चाहिए कि यह सही लोगों को नाराज कर रहा है। मेरा मतलब वामपंथी लोगों से है।

 

वहीं एक यूजर ने लिखा, “ जनता को भी सच जानने दो। कड़वे सच के लिए आंखें मूंदकर आप हर बार मूर्ख नहीं बना सकते।

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